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February 5, 2012 Kavita / Poems, Shayari 0 Comments 2,988 views

दिलों में तुम अपनी…

दिलों में तुम अपनी  बेताबियाँ लेके चल रहे हो
तो ज़िंदा हो तुमLife - Zindagi

नज़र में ख्वाबों की
बिजलियाँ लेके चल रहे हो
तो ज़िंदा हो तुम

हवा के झोकोन के जैसे
आज़ाद रहनो सीखो
तुम एक दरिया के जैसे
लहरों में बहना सीखो
हर एक लम्हे से तुम मिलो
खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समा
देखें यह निगहाएँ

November 29, 2011 Shayari 0 Comments 1,266 views

कल हो ना हो…

आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो

क्या पता
कल हो ना हो…

November 29, 2011 Shayari 0 Comments 1,162 views

वक़्त जाया किया सोचते सोचते…

वक़्त जाया किया सोचते सोचते |
कुछ नहीं कर सका सोचते सोचते ||

मेरी मंजिल किनारे पे हँसती रही |
मैं भँवर में फँसा सोचते सोचते ||

राह सुनसान है और जंगल घने |
और मैं चल रहा सोचते सोचते ||

पास आने में वो हिचकिचाते रहे |
मैं भी आगे बढ़ा सोचते सोचते ||

मैंने दी जो बधाई उसे ईद की |
उसने भी कुछ कहा सोचते सोचते ||

मेरे दिल पे उसे लिखना था ख़ुद का नाम |
नाम मेरा लिखा सोचते सोचते ||

सब तो जाने कहाँ से कहाँ जा चुके |
और मैं रह गया सोचते सोचते ||

ज़िन्दगी की ग़ज़ल तो अधूरी रही |
इक सही क़ाफ़िया सोचते सोचते ||

लोग पढ़ – पढ़ के सारे परेशान हैं |
मैंने क्या लिख दिया सोचते सोचते ||

November 29, 2011 Shayari 2 Comments 2,980 views

ऐसा एक दोस्त चाहिए…

ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो ‘मित्र’ का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए,

November 29, 2011 Shayari 2 Comments 1,691 views

अजनबी दोस्ती…

दर्द में कुछ कमी-सी लगती है
जिन्दगी अजनबी-सी लगती है

एतबारे वफ़ा अरे तौबा
दुश्मनी दोस्ती-सी लगती है

मेरी दीवानगी कोई देखे
धुप भी चांदनी-सी लगती है

सोंचता हूँ की मैं किधर जाऊँ
हर तरफ रौशनी-सी लगती है

आज की जिन्दगी अरे तौबा
मीर की सायरी सी लगती है

शाम-ऐ-हस्ती की लौ बहुत कम है
ये सहर आखरी-सी लगती है

जाने क्या बात हो गयी यारों
हर नजर अजनबी-सी लगती है
दोस्ती अजनबी-सी लगती है…….